लिखना है
एक प्रेम गीत
बदलना है ह्रदय
बसती है काली छायाएं जिसमे
बसानी है पूरी एक रात
गर्मी की
चांदनी में नहाए हुए बिस्तर
रातरानी के फूलों की खुशबू
नवम्बर की सुबहें
नंगे पांव
मखमली दूभ पर दौड़ना
हरे पत्तियों
पर खिले सफ़ेद मोती
और पीना वो नशा
जो दूभ शीर्ष पर है
अटखेलियाँ करनी है
उस तालाब के पानी से
जिसमे खिलखिला रहे
कुमुदनी और कमल
खिलखिलाना है
समेट लेना है पर्वत
चिनार के वृक्ष
मीठे पानी के सोते
ढलान के आगे
सफ़ेद मैदान
जाड़े की धूप
किसी गुलाब के मैदान में
एक फूल तोड़ जूड़े में लगाना है
नाचना है अगले बारिश
रिमझिम रिमझिम बूंदों से भर अंजुरी
फेकना है एक चहरे पर
सुध बुध खो
गहरे उतरना है
अगले बारिश गाना है
प्रेम गीत
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