वर्षों पहले
बच्चे ने देखी थी दुनियाँ
अब बच्चा उसका
आँगन में
गर्मियों की तमाम रातें
माँ का आँचल छोड़
पिता के साथ
तारों की कहानियाँ
उड़न-खटोले की सैर
आकाशगंगा
चाँद की शीतलता
महसूस करता है
बच्चे की एक उलझन है
हमारा घर बड़ा या तारा
ताखे पर जलता जो दीया है
बड़ा है तारे से
पिता झुंझलाता
फिर दूसरी बातों में बच्चे को भटकाता
उसके मन में भी यही सवाल
जब वह नन्हा था
उसके पिता ने नहीं बताया
सुनाया था गाना
चंदा मामा दूर के
पुए पकाए गुड़ के
सुबह-सबेरे पैना और खाना लिए
जाते हुए खेत
बच्चा सवालों की झड़ी लगाया
पिता फिर झुंझलाया
मुझे नहीं मालूम
इन खेतों का पानी
सूख क्यूँ गया
दरारें क्यूँ पड़ जाती हैं
खेतों में
[पैरों में भी]
आम के इस पेड़ में
क्यूँ नहीं आये मोजर
चार सालों से
हवा कभी पूरब कभी पश्चिम से
क्यूँ आती है
और अंत में
जो बच्चे ने नहीं पूछा
सवाल वह
पिता के कलेजे पर उग आया
अन्न उगा
कभी किसी रात को
भूखे क्यूँ सो जाती
मुन्ने की माँ
बहुत गहन अभिव्यक्ति...!
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर प्रस्तुति !!
जवाब देंहटाएंसच है कितने ही सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं । कविता भा गई ।
जवाब देंहटाएंशुक्रिया आशा जी
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